History

इतिहास

प्रगति हि प्रगति का इतिहास बन जाता है
ऊंची ऊंची बाहों में
आकाश भी सिमट आता है
विष का घुट पिकर ही
नील कंठ कहलाता है
कांटो से घिर कर भी
गुलाब खिल जाता है
भरे भरे दल दल में
कमल ऊभर आता है
एक तिनका भी
डूबे को सहारा दे जाता है
झुझता हुआ जिवन हि इतिहास हमें दिखलाता है
प्रगति हि प्रगति का इतिहास हमें बताता है
रास्ता भले ही ना हो
फिर भी मंजिल कि आश रहती है
कोई साथ हो ना हो
मुकद्दर हमेशा हमारे साथ रहती है!
हर खुशी हर गम टल जाती है
हर मौसम आकर बदल जाती है
सुबह दोपहर शाम की तरह
रात भी आकर गुजर जाती है
प्रगति ही प्रकृति हि
वो सुनेहरा इतिहास हमें सुनाता है
          देव राज ✍🏼

Comments