जब खुद की कीमत पता चल जाती है, तो कोई आपको त्याग भी दे तो फर्क नहीं पड़ता..🕶️
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नवम्बर वाली इन मध्यम शीतल शामों से मेरा करीबी रिश्ता रहा है.. कभी-कभी लोगों से ज्यादा हम उस समय की वातावरण को मिस कर रहे होते हैं.. जिसकी कसक आज़ भी हमारे दिलों में अटकी हुई है... खैर लौटकर कुछ नहीं आता.. लोग तो बिल्कुल भी नहीं..!!
दो लोग करीब आकर भी क्यों अधूरे रह जाते है,क्योंकि वो दोनों अपने अहंकार में होते हैं,लेकिन एक रोज़ उनको ये एहसास होगा कि उनके अहम से बढ़कर भी कोई चीज़ हैं,जो मायने रखती हैं,वो हैं एहसास किसी को हमेशा के लिए खो देने का एहसास उस वक्त का जब चीज़ें क़ाबू में थी, एहसास उस सिलसिले का जब ये यक़ीन था,कि मुझे इस जहां में उतारा गया हैं,सिर्फ़ इस शख़्स के लिए लेकिन हम खो देना पसन्द करते हैं... केशव ❄️
जिंदगी, जिंदगी न रही। लगभग 10 दिनों से पता नहीं मेरे नींद को कौन खाए जा रहा है। हर दिन सुबह लगभग 3:13 में मेरी नींद खुल जा रही है। आज भी मेरी आंखें पूरे 3:13 में ही खुली। कमरा पूरी तरह से अंधेरे में घुला था। पंखा बंद था। पंखा क्यों बंद था मुझे मालूम नहीं। पंखे की जरूरत महसूस हो रही थी, परंतु शरीर उठ के पंखे को चालू करने के लिए राजी नहीं हो रहा था। मुझे ये कहने में झिझक नहीं होगी, कि मैं एक आलसी किस्म का इंसान हूं। पूरे जिस्म के ऊपर पसीने की बूंदे रेंग रही थी। कमरे की खिड़की खुली थी। पूरा शहर इस वक्त सो रहा था। मैं सोचने लगा कि कोई बीमार ही होगा जो इस वक्त जगा होगा। पूरा शहर इस वक्त एक विचित्र सन्नाटे में तैर रहा था। इस वक्त का सन्नाटा मेरे अंदर के रूह को सांत्वना दे रहा था। मैं उस वक्त तक बिस्तर पे ही लेटा था। गर्मी से लतपथ होने के बावजूद मेरे में इतनी शक्ति नहीं थी कि मैं उठ के पंखे का बटन दवा दूं। मैने महसूस किया कि मेरे जिस्म को कोई जंजीरों से बांध रखा है। और मेरी आलस्पन देखिए मैं उन्हें छुड़ाने की कोशिश भी नहीं कर रहा हूं। मेरी बीमारी क्या है मुझे मालूम नहीं। मैने कुछ समय बा...
सभी स्त्रीयों को समर्पित... 💗💗 जो केवल आपके भरोसे पर अपने अपनो को,अपने बचपन के आंगन तक को छोड़ आती हैं, वो लड़कियां जो अपनी चीजे अपने भाई बहनों से भी शेयर नही करती, वो आपके घर आकर कितना कुछ एडजेस्ट करती हैं। आसान नही होता है अपना घर छोड़कर दूसरे घर के अपनाना, अनजान लोगों के बीच सरल होकर रहना,खुद को संभालकर रखना, उन सबको अपनेपन का एहसास करवाना,किसी को महसूस तक न होने देना कि उसे असहज महसूस होता है, क्योंकि यहां सबकुछ अलग है, नया है। तो अपनी पत्नी के लिए आपका भी कुछ फर्ज़ तो बनता है, क्योंकि उस घर में वो अगर वो किसी पर सबसे ज्यादा विश्वास करती हैं तो वो हैं आप। उन्हे इतना स्नेह दें की उन्हें कभी आपके घर में कोई कमी न खले,उनसे बातें शेयर करें ,उनसे पूछें की उन्हें कुछ कहना तो नही,उन्हे समझने की कोशिश करें। वो कुछ नया करें तो उन्हे अप्रिशिएट करें उनका मनोबल बढ़ाएं, कभी बिना किसी वजह के उन्हे कुछ तोहफे दें भले ही एक फूल दे दें। प्रेम में लेन देन मायने नही रखता, ये तो सिर्फ इसलिए है कि छोटी छोटी खुशी उसके चेहरे की रौनक बढ़ा सके। उनके कुछ कहने से पहले आपको उनकी हिचक महसूस होनी च...
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thanks god blas you