पता नहीं कयूं

पता नहीं क्यूं आज तू याद आई है !
सुना है कि तूने आज फिर की बेवफाई है...

क्या कमी थी मुझमे जो मुझे छोड़ गई ?
फिर उसमें क्या नहीं था जो उसको भी ठुकराई है...

सुना था प्यार पाया नहीं अपनाया जाता है !
फिर क्यूं तूने खुद को और सबको दी तन्हाई है...

जिस्म -ओ-जान थी तू मेरी किसी वक्त,
आज क्यूं तू मेरे और सबके लिए तू पराई है ?

मै तो तेरे प्यार के लिए ही जीना और मरना चाहता हूं,
पर क्या करूं खुदा ने मेरी जिंदगी में लिखी बस तन्हाई ही तन्हाई है...

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