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aahsaso ka dard. ✨

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बीते कुछ समय से मैंने कुछ भी नहीं लिखा है। मेरी स्मृतियों में बसने वाले सभी बिम्ब धुँधले पड़ चुके हैं। मानो भीतर किसी की याद ही न बची हो। लिखते-लिखते अक्सर ऐसा लगने लगता है मानो इतना लिख लिया हो कि अब लिखने को कुछ बचा ही न हो। लिखने वालों का दिल पत्थर हो चुका होता है। लिखते-लिखते, वे एक ही उदासी को हज़ारों बार जीते चले जाते हैं। उनके जीवन की त्रासदियाँ, वे रोज़ लिखते हैं। साथ, साथ उन त्रासदियों को जीते भी हैं। ऐसे में दिल पत्थर करना पड़ता होगा, ये मान लेना चाहिए। मेरे हाथों में आजकल बहुत दर्द भी रहता है। पड़े-पड़े शायद बेकार होते जा रहे हैं। नसों में शब्द जमते जा रहे हैं, मानो। ये शब्द कलम या कीबोर्ड के रास्ते बाहर आने को उतावले हैं लेकिन एक अजीब से सैडिस्टिक माइंडसेट के साथ जी रही हूँ मैं। शायद, खुद को ख़त्म करने की हिम्मत नहीं है मुझमें, इसीलिए अपने अंदर के उस इंसान को खत्म कर रही हूँ जो मेरे दर्द, मेरी उदासी को लिख सकता है। दुनिया ज़्यादा देख नहीं पाती है। दुनिया का दस्तूर है, जो दिखता है वही समझ में आता है। न मैं अपना दर्द लिखूँगी, न उसे कोई पढ़ेगा और न उसका कोई अस्तित्व बचेगा। लिखना एक बड़ी...

self love will never hurt you 🙂

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खुद को प्यार करना क्यों है जरूरी ?  किसी ने सच ही कहा है कि यदि आप स्वयं से प्रेम नहीं करते हैं , तो आप दूसरों से प्यार नहीं कर सकते । अपने आपको प्यार करना स्वयं के विकास में निवेश करने जैसा है । आप ही हैं , जो अपने जीवन की दिशा को तय कर सकती हैं , यानी खुद ही यह तय कर सकती हैं कि आपको क्या करना है । अपनी भावनाओं , रिश्तों और बाकी व्यावहारिक जिंदगी के लिए दूसरों पर निर्भर रहने से हीनभावना बढ़ सकती है । कम से कम अपनी जिंदगी की लगाम खुद के हाथ में रखने का गर्व आपके चेहरे पर दमकेगा । यह आत्मविश्वास आपको हर दिन वैलेंटाइन डे जैसा रूमानी बना देगा । एक दिन के 24 घंटे ऑफिस व घर के काम में पूरा दिन बीत गया । रात में सोते हुए भी मन में यही गुणा - भाग कि कल क्या - क्या करना है ? पर सवाल यह कि रात - दिन की इस भागदौड़ के बावजूद आप खुश क्यों नहीं हैं ? इसलिए कि ड आपकी परवाह कोई नहीं कर रहा ? बेहतर है , इससे पहले स्वयं से पूछें कि आपने खुद के लिए कितना समय निकाला ? उत्तर में शायद निराशा हो हाथ लगे , क्योंकि इस सवाल का जवाब आपके पास नहीं है । होगा भी कैसे ? आप तो हमेशा खुद को आखिर में ...

Aab wo wakt nhi Raha 🌜

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दुनिया का सबसे बदनसीब और बदसूरत पल जानती हो कब होता है, जब तुम्हारे रोने से तुम्हारी आँखों का काज़ल फ़ैल जाता है..और तुम्हारी मोटी मोटी इन आँखों से आँसुओं का सैलाब उमड़ पड़ता है..जिन पलकों की छाँव में मैंने कई गर्मियां गुज़ारी हैं, मैंने जिन आँखों में अपनी एक दुनिया देखी है, जिसके काज़ल का काला रंग मुझे दुनियां में सबसे सुंदर औऱ सबसे गाढ़े रंग सा लगता है, उसका यूँ इस तरह फ़ैल कर फ़ीका पड़ जाना मेरी बेचैनी बढ़ा दिया करता है.. जब तुम पूरा दिन समझदारी के कई ऐसे नमूने मेरे सामने रख दिया करती हो, जिसमें तुम्हारी समझदारी देख कर मैं घमंड करने लगता हूँ, वहीं रात को एक छोटी सी बात पर तुम्हें यूँ बच्चों की तरह रोता हुआ देख मेरे कंधे कमजोर पड़ जातें हैं..मैं तुम्हें रोता हुआ देखकर ये भूल जाता हूँ कि गलती किसकी है, बस मैं तुम्हें चुप करा देने में लग जाता हूँ.. मुझे लगता है कि मैं दुनिया का सबसे हैवान आदमी हूँ जिसने तुम्हें रुलाया है, उसे जिसने मुझे ज़रूरत से कही ज़्यादा प्रेम किया है.. उस वक़्त रोते हुए कही गई तुम्हारी हर एक बात मेरे सीने को चीरती जाती है, मैं जब नाकाम होने लगता हूँ तुम्हें चुप कराने में, मैं एक...

fhir mohhabat

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ज़िंदगी मुहब्बत है और इस मुहब्बत की कहानी में सबसे अहम किरदार हो तुम। तुमसे बात-बेबात झगड़ा, तुमसे इक ख़ीच-खिचाई, तुम्हें तंग करना और तुमसे उलझ जाना ज़िंदगी है। तुम्हारे साथ दूर देश चले जाना, नौका-विहार करते हुए पाँव को पानी में रख देना, पंक्षियों की परवाज़ पर अपनी ख़ाहिश रख देना कि- मैं भी उड़ना चाहता हूं तुम्हारे साथ.. ज़िंदगी है। तुमको चूम लेना या तुमको अपने बदन पर ओढ़कर सो जाना ज़िंदगी है। तुम्हारे लिए दुनिया बनाना.. तुम्हारी दुनिया बन जाना.. सिर्फ़ तुम्हारी बात करना.. सिर्फ़ तुमसे ही बात करना ज़िंदगी है। तुम्हारी नादान ही अदाओं पर चुप मुस्कुराना, तुम्हें किसी 10 साल की बच्ची की तरह प्यार करना, तुम्हें परियों की कहानी सुनाना, तुम्हारा प्रेमी हो जाना, तुम्हें अपने सीने से लगाकर ये यक़ीन दिलाना कि- मैं सिर्फ़ तुम्हारा हूं.. ज़िंदगी है। ज़िंदगी साँस या धड़कन भर नहीं है.. ज़िंदगी असल में तो तुम हो। तुम ज़िंदगी में जान हो.. बाक़ी बदन हूं मैं।

🥺✨ tanhai

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मै, एक पेड़ के नीचे बैठा हूँ जहां थोड़ी धूप है और थोड़ी छांव भी। यहां ठंडी-ठंडी हवा बह रही है। पेड़ पर बहुत सारे पक्षी चहचहा रहे है। ऐसा प्रतीत हो रहा है कि जैसे वे आपस मे कुछ बात कर रहे है। दरअसल मुझे समझ मे तो नही आ रहा कि वे क्या बात कर रहे है लेकिन हां... आनन्द बहुत आ रहा है। #alon #million #yaad #2022 #photooftheday #bitturaja420 #raja420 #google #yashkeshav  #photofav #

dream

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मैं पैसों से गरीब होने के वजह से भारत के कई खूबसूरत जगहों पे नही जा सकता, वहां की खूबसूरती और प्राकृतिक का प्यार नही पा सका.. औरों का तो पता नही लेकिन मुझे घूमना बेहद पसंद है.. मैं चाहता हूं पहाड़ों के ऊपर चढ़ पृथ्वी को निहारना, समुंद्र किनारे बैठ सूर्य को उगते हुए देखना,।। 🌧️🌞

main lekhunga 🕊️

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लिखूंगा, आज लिखूंगा धर्म पर, अधर्म पर, राम पर, रावण पर, हार पर, जीत पर, शोषित पर, वंचित पर , दलित पर , बुद्ध पर, जैन पर, दर्शन पर, हिन्दू पर, मुस्लिम पर, गर्व पर , अहंकार पर, उम्मीद पर, निराशा पर, शत्रु पर, मित्र पर, गरीब पर, अमीर पर, कृष्ण पर, कंस पर, ज्ञान पर, अज्ञान पर, विज्ञान पर। आज लिखूंगा मैं दुनिया की हर विधा पर, हर बात पर, हर सोच पर। आज लिखूंगा मैं । लिखूगां उस शहर के उन उस इन्सान के बारे में जो खुद के बच्ची होते हुये भी दूसरी लड़कियों को गिद्ध की नजर से देखता है । लिखूंगा तरसती आँखों में बसती उस भूख के बारे में जिसे होटल का मालिक खाना फेंकते हुए भगा देता है। लिखूंगा उन आँखों के बारे जो किसी माँ को दूध पिलाता हुआ देखकर अश्लील हो जाती है। लिखूंगा आज उस कचरे के डिब्बे में नवजात भूर्ण को फेंकते हुए आदमी के बारे में जो अपने बच्चे की खरोच पर भाग चला जाता है। लिखूंगा आज उस आदमी की मनोस्तिथि पर जो हिरोशिमा पर बम गिराने के बाद आत्महत्या कर लेता है। लिखूंगा आज उस मजहबी कट्टर नेता पर जो अपने बच्चे के खातिर कभी चादर चढ़ाने मस्जिद जाता है तो कभी घर में महामृत्युंजय की पूजा करवाता है। लिखू...

kuch baate

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सुनो ना, मैं तुम्हे बताना चाहता हूँ अपनी खामोशी में छिपी पीड़ा, मैं तड़प रहा हू रेत पर पड़े मछली की तरह, उसे पानी की तलाश है और मुझे तुम्हारी प्यार की। मुझे नही पता कि तुम मुझे चाहती हो या नही, शायद तुम मुझसे नफरत भी करती हो, या फिर तुम किसी और से प्यार करती हो, लेकिन मुझे मालूम नही हो। मैं तुम्हारा इंतजार कर रहा हूं अभी भी। तुम्हे नही पता होगा लेकिन इतंजार करते करते 7 साल होने को हैं, अब शायद तुम्हारे मन में ये सवाल आये की अभी क्यों मैं तुम्हे अपनी पीड़ा बताना चाहता हु? मैंने अपनी खामोशी तुम्हे बतलाने के लिए ना जाने कितने तरीके अपनाए लेकिन सब विफल हो गए जैसा कोई पहली नींद में देखें गए ख्याब हो।  मुझे खुद भी नही पता कि आखिर मुझे तुममे ऐसा क्या दिखा की मैं तुम्हारा दीवाना हो गया, शायद तुम इसे एक साजिश समझो, लेकिन तुम्हे मैं बता दूँ, मैं तुम्हे उस समय से चाह रहा हू जिस वक्त मैं जिस्म से वाकिफ भी नही था।  शरुआत करते है शुरू से-  उस समय की बात है जब मैं 7 वी में था, प्यार व्यार मुझे सब बकवास लगता था, स्कूल भी बहुत कम जाता था, इतना कम जाता था कि 6वी में ड्रेस का पैसा और छात्रवृति ...

doha

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रतन अमोलक परख कर रहा जौहरी थाक। दरिया तहां कीमत नहीं उनमन भया अवाक।। धरती गगन पवन नहीं पानी पावक चंद न सूर। रात दिवस की गम नहीं जहां ब्रह्म रहा भरपूर।। पाप पुण्य सुख दुख नहीं जहां कोई कर्म न काल। जन दरिया जहां पड़त है हीरों की टकसाल।। जीव जात से बीछड़ा धर पंचतत्त को भेख। दरिया निज घर आइया पाया ब्रह्म अलेख।। आंखों से दीखे नहीं सब्द न पावै जान। मन बुद्धि तहं पहुंचे नहीं कौन कहै सेलान।। माया तहां न संचरौ जहां ब्रह्म को खेल। जन दरिया कैसे बने रवि-रजनी का मेल।। जात हमारी ब्रह्म है माता-पिता हैं राम। गिरह हमारा सुन्न में अनहद में बिसराम।

Khuuli kitaab hu main

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 खुली किताब सा हूँ लेकिन, कई राज़ छुपाए बैठा हूँ। लाखों बातें करके भी, जज़्बात छुपाए बैठा हूँ। पलकों में आँसू और आँखों में आस छुपाए बैठा हूँ कि तू आए, आए मेरे सालों से थामे इस इंतज़ार का हाथ पकड़ने, मेरी समझदार खामोशी को फ़िर से मेरे झल्लेपन के शोर में बदलने और हाँ इस दफ़ा ऐहसासोंकी अल्फ़ाज़ों से दोस्ती करा के ही मानूँगा दिल के दस्तावेज़ों को तेरी मेज पर यथार्थ सजा के ही मानूँगा। हाल-ए-दिल तुझको सुनाके ही मानूँगा..!! 🖤❤️